चाँद 🌝
बैठ कर अंधेरों की छाव में,
एक चाँद नजर आया मुझे।
रही निहारती टक - टक उसे;
उसके दृश्यों ने उलझाया मुझे।।
ह्रदय की धधकती आग को,
अपनी शीतलता में डुबो बुझाया उसने।
लौट आयी...
एक चाँद नजर आया मुझे।
रही निहारती टक - टक उसे;
उसके दृश्यों ने उलझाया मुझे।।
ह्रदय की धधकती आग को,
अपनी शीतलता में डुबो बुझाया उसने।
लौट आयी...