...

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कितना अजीब है
कितना अजीब है,,,
सब जानकर भी अनजान हो जाना..
बिन नींद के सुनहरे ख्वाब में खो जाना।
कितना अजीब है,,,
प्रेम में मिलन को तरसते रह जाना..
जब मिले तो उससे दूर जाना,उसे ठुकराना।
कितना अजीब है,,,
सब पाकर,पल भर में खो जाना..
तन्हाई में यादों तले चुपके से रो जाना।
कितना अजीब है,,,
बिना उम्मीद किसी के इन्तज़ार में रह जाना..
समेट कर खुद को,एकतरफ़ा प्यार में रह जाना।
कितना अजीब है ,,,,🙏