...

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गर किसी से
गर किसी से टूट कर इश्क़ किया जा सकता है,
तो किसी की मोहब्बत से जुड़ा भी तो जा सकता है।
यूं किसी की हंसी कर जान निसार की जा सकती है,
तो किसी के आंसुओं के लिए जिया भी तो जा सकता है।
जब किसी पराए से रिश्ते को बचाया जा सकता है,
तो अपनों के रिश्तों को निभाया भी तो जा सकता है।
माना कोई तुम्हारी और तुम उसकी ज़िन्दगी ना बन सके,
लेकिन ख़ुद की ज़िंदगी को तो अपना बनाया जा सकता है।
माना मोहब्बत किसी की नहीं सुनती,
लेकिन मोहब्बत को तो सुना जा सकता है।
जरूरी नहीं हर इश्क़ मुकम्मल हो
लेकिन अधूरी मोहब्बत को भी तो किसी कोने में सजाया जा सकता है।