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मात - पिता __
RAAJ PREEET

सुखया दरख्त ढलगी छाया साथ इब ना कोई साया
बात टैम की होया करै PREEET पाछै रे या जग हंसाई
बिन बाप के क्या का जिना आ जै जिन्दगी मा कडयाई
क्यू कर दिल नै डाटूं मित्र डांट मै कदै बाप की डांट नै दुनिया सिखाई
बिन बाप आपनै आपनै ना रेदें जमीना और घर की हो जा फिर बंटाई
बिन बाप के कुछ आच्छा ना लगे ना रैंदी किसे की चाही
रोवै घर कै भीतर बड कै बाप गैल जो विहाई
कुछ ना फिर और मांगदी बेटी वो जिसनै कैवै या दुनिया पराई
सासरै मे PREEET उलहानै सुनै वा जिसनै सासरै मै दुनिया बसाई
कदै वीर न रोना आ जा जद सुनदी बाप की हथाई
PREEET कित इब रे गे शायर सजाने छुटी कलम हाथ तै और छुटी स्याही
बाप के होंदै ऐसा लागे जनू होवै शीतल सुराही
बेटी मायके आवै तो किस धौरै आवै यद आवै याद बाप की अस्थियाँ बहाई
शमशाना मै फैर राख उडै सै जिस बाप नै पकड़ कै उंगली चाल चलाई
फिर उस बेटे का के सै जीना जिस बेटे नै अर्थी माँ बाप की ठाई
PREEET मात- पिता दिवस तो सब मनावै पर घर मै होंदी ना
माँ बाप की कोई सुनवाई
दिल नै सोची उँगलियाँ तै लिखी PREEET बात दिल मै जो आई
आंसूयां तै फैर आंखया भर गी होंदी ना कित लुकाई
वो घर फैर PREEET घर ना रैंदा जित आ जा माडी लुगाई
PREEET एक बेटी कै देख कै आंसू उसी नै या बात लिखवाई
रातां नै फैर गिनै वा तारै पर दिखै ना कित आसमान मै रोशनी
बाप नै जो फैलाई
सारै परिवार नै PREEET साथ फैर छौडया अकेली जान
दुखां मे जब पाई
आया जिन्दगी मै फैर PREEET जिसनै राह नई दिखलाई
PREEET गैल ही प्यार घणा , और PREEET गैल ही लड़ाई
कोई न अपना सब पराये मतलबी रिश्ते इस दुनिया मा ही
माँ गैल इब बात हो जा पुछै वा दिन बिताई
राज दफन सै दिल अन्दर किस किस नै कैवै बेटी सच्चाई
बचपन मै साथ छुटया बाप का जवानी तै पैलां ही कर दी सगाई
वो कदै समझ ना पाया जिस गैल थी मनै विहाई
PREEET यादां नै बाप की कदै ना दिया हासन रो कै जिन्दगी गंवाई
खा कै चक्कर पड गई फैर आंगन जब लागी होन विदाई
लिखै PREEET हाल दिल का ना आच्छी लागी फैर मौसी मामी काकी ताई
फुल बागां मै जिस तरहां होवै वैसे माई तो हो माई
कोशिश तो पुरी करैं है फैर भी बाप की जगहां न ले सके भाई
PREEET की बातां दिल पै लागै , लागै चोट गहरी PREEET. नै कोये खाई

© आवारा पागल दीवाना