...

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कभी कभी
कभी प्यारा सा ख्वाब बनके आते हो तो ,
कभी काली घनी रातों में चांदनी बनके आते हो।
कभी वो मीठी हवाके झोके में होते हो तो ,
कभी वो गीली मिटटी के ख़ुश्बू मे घुल जाते हो ।
कभी इस अनकहि कागज के पन्ने में बस जाते हो तो ,
कभी इस कलम की स्याही से अंक जाते हो।
आप हो तो यहीं दिल में
पर कभी कभी दूर होने का एहसास भी दिला जाते हो ।

© Riha