...

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कब हुऐ हैं
अपनों की ज़रूरत तो हमेशा पड़ती हैं
ख़ाली दीवारों संग कब जश्न हुऐ हैं ?

इस दौर में ज़िन्दा हो गनीमत समझो
वहशत से मुक्त भला कब चमन हुऐ हैं ?

आदमी ही होता हैं मर कर कब्र में
दिल के अरमां कब दफ़न...