...

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चुप्पी
अब हम बेसबब बात नहीं करते
खुद से दरकिनारी सीख ली हमने

साफ़ बात हो या मैला दिल का फर्श
चुप्पी बुहारी सीख ली हमने

सहरा ऐ जिन्दगी में सूखी धंसती हुई
रेत पर सवारी सीख ली हमने

चुंधिया जाती है अब आँखों में रौशनी
अंधेरो में ही चाँदमारी सीख ली हमने

कर लूँ कोई भी हमसाया ,बदन ए हमसफ़र में
वफाओ में भी गद्दारी सीख ली हमने

खुले मुँह ने बस आह की, आवाज ना की
बस इस तरह ये कलाकारी सीख ली हमने



© Ninad