...

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कारीगर कलम के
सुनो इश्क में है हम यूं इश्क मेरा ठुकराया ना करो
इस दिल मे जगह दी है तुम्हे दिल को यूं दुखाया ना करो
चल माना की औकात नहीं हमारी तुम्हे कुछ देने की
पर इतना याद रखना कारीगर है हम कलम के
शब्दों का ताजमहल अभी तुम्हारे नाम कर दूं
तुम इज़हार ए इश्क कुबूल तो करो

© Anshu