...

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मैं ढलता सूरज
मैं झूमता राहगीर तुम बादलो सी मंजिल बन जाना
मैं ढलता सूरज तुम मदहोश सी शाम बन जाना

मैं साँवला सूरत सा तुम इस सूरत की नूर बन जाना
मैं मनचला शायर तुम इस शायर की पहचान बन जाना

मैं गुमसुम साहिल तुम चंचल सी झील बन जाना
मैं पत्थर का मूरत तुम मन की आवाज़ बन जाना


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