...

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एक अच्छा इंसान हूँ
मैं झूठो की खान नहीं न में धर्मो की दुकान हूँ
में सच्चों का साथी और अच्छो का कदरवान हूँ
क्योकि सबसे पहले मैं एक अच्छा इंसान हूँ।

"क्या बात कहूँ,
किस मतलब की
जिस मतलन में कुछ सार नहीं
वो मतलब भी क्या मतलब है
जिसमें किसी का उद्धार नहीं।"
ख़ुदा ने जो था दिया, मैं वो भूला हुआ फरमान हूँ।
क्योंकि सबसे पहले मैं एक अच्छा इंसान हूँ।

प्रकृति की थी रक्षा करनी,
पर देते उसे कष्ट हैं
जरा ध्यान लगाकर देखो
यहाँ सारे के सारे भ्रष्ट हैं।
ईश्वर के नाम पर चलाते अपनी दुकान हैं;
हमको लड़वा कर पूरे करते अपने अरमान हैं।
न मैं हूँ हिन्दू और न में मुसलमान हूँ क्योंकि सबसे पहले मैं एक अच्छा इंसान हूँ
एक अच्छा इंसान हूँ।।
© VSAK47

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