...

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उदासी
जिंदगी का अंधेरा, मैं मिटाने चला था।
मोहब्बत का दीपक, मैं जलाने चला था।।
कभी हँसना तो कभी रोना ही है जिंदगी।
इसी सोच को आज,मैं आजमाने चला था।।
दिन और रात के आँचल में गुजरती है जिंदगी।
गुलशन मोहब्बत का,मैं खिलाने चला था।।
नही रास आई मुझको, यह राह मोहब्बत की।
दर्दोगम जिंदगी के,मैं उससे छिपाने चला था।।