...

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किस मोड़ पर खोए हम
हर गली अनजानी
सारी सड़कें सूनी थी
उस पत्थरों के शहर में
हर मोड़ पर रोए हम

इतना तो याद है मुझको
मैंने हाथ नहीं छोड़ा
इससे आगे कुछ याद नहीं
किस मोड़ पर खोए हम

शोर सुनाई देने लगा था
मंजिल इतनी करीब थी
खरगोश से बैठे सोच रहे हैं
किस मोड़ पर सोए हम

एक ही सफ़र में कोई
दो बार नहीं लुट सकता
तुमको गंवा दिया तो फिर
बड़े बेखौफ से सोए हम

एक मुद्दत से पत्थर हो चुके
तेरा छूना जादू टोना
यह देख कर बेहद खुशी हुई
बड़ी देर तक रोए हम

#छगन #जेरठी
© छगन सिंह जेरठी