...

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आखिर ये क्या है...??
कोई मलाल नहीं है,
कोई बवाल नहीं है,
फिर भी दिल में ज़लाल है।

कोई रोष नहीं है,
कोई क्रोध नहीं है,
फिर भी दिल में अवरोध है।

किसी से ईर्ष्या नहीं है,
किसी से जलन नहीं है
फिर भी दिल परेशान तो है।

तुमसे कोई गिला नहीं है,
और नया कोई मिला नहीं है,
फिर क्या ये दिल ए दर्द बेवजह ही है।

आखिर ये है क्या ..?
मुझे नहीं मालूम इसे क्या कहते हैं,
बस दिल में कोई हूक सी उठ रही है,
ये तन्हाई दिल की जाने कैसे सहते हैं.!

कुछ तो परेशानी है इस दिल को सता रही,
जाने क्यों मुझसे नज़रें चुरा रही...
काश एक बार आकर तुम पूछ लेते...
आख़िर ये मुझे क्यों नहीं बता रही..??

काश तुम एक बार आ जाते तो...
तो शायद ये दिल-ए-दर्द कम हो जाते,
अपनी गर्माहट भर देते रूह में..
तो हम भी जरा सा सुकून पाते ।
काश....!!!

आकांक्षा मगन "सरस्वती"

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