...

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चुनाव
के भईया कोई कहे मरहम दे देंगे,
तो कोई कहे गायबै कर देंगे घाव।
मियां ऐसे वादे अब बहुत दीख पड़ेंगे,
क्योंकि आ गया है हमारे यहां चुनाव।।

खैर वादे से याद आया,
परसो बजरिया में एक नेता जी मिले।
देखते ही टूटे, “भईया हांथ जोड़ के सलाम”।
हम भी बोले “महमूद मियां, वा-अलैकुम प्रणाम”।

हाय!! लहजे में ये लचक,
उफ़ !! बातों की चमक।
कहा हमने , “अजी क्यों तकल्लुफ करते हैं”।
पान में चूना लगाते हुए रूहानियत से बोले,
“सरकार हम तो आप से ही जीते मरते हैं ”।

तभी किसी ने आवाज़ लगाई,
“अरे मिश्रा जी कैसे हैं”??
कुछ रहकर मियां महमूद बोले,
“अपन तो क्या है यार अयोध्या में ही रहते हैं ”।


हमने भी थोड़ी शान बढ़ाई, और कॉलर उठा के कहा,
“अरे पानवाले कुछ करते क्यों नही, कितनी गर्मी हो रही है ”।
मियां झटपट बोले,
सही फरमाते हैं जनाब, हाल ही में मंत्री जी से इसी विषय पे बात हो रही है ”।

(मंत्री जी)– बड़ी चिंता में थे, फ़िक्र में थे साहिब,
आंखों में नमी लाके बोले,“लोग अपनी जनता के लिए क्या–क्या nhi करते हैं ”।
(मियां)–तो हम बोले गर्मी से उनको बचाने का उपाय??
(मंत्री जी)–कहे एक काम करते हैं,
“हम सब अपने घर से एक एक पंखा खोल हर पान की दुकान पे टंगवा देते हैं ”।


इतना सुनते ही हम एकदम हांथ जोड़ के बोले,
“आखिरकार दिन हमारे भी फिर गए”।
मियां हमारे जुड़े हांथ को पकड़ के बोले,
“अरे आप हांथ न जोड़ें माई–बाप”,
और सीधा हमारे चरणों में गिर गए ।

नेता और जनता के बीच ऐसे रिश्ते का मुजायरा देख,
आस –पास खड़े लोगों की आंखे भर आईं ।
तिस पर एक ने रोते हुए बोला,
“प्रभु आप तो साक्षात हो ईश्वर की परछाई ”।


फिर थोड़ी बात–वात आगे बढ़ी, हमने कहा यार नेता जी,
“इक समस्या है , इक तकलीफ़ है”।
क्या...??
“ये श्वजन हमारे खुले मे शौच करते हैं ”।
कुर्ते की जेब से फोन निकालते हुए मियां बोले,
“मिश्रा जी आप फ़िक्र न करें, हम जल्द ही इसका बंदोबस्त करते हैं ”।


इतना देख पान वाले का धीरज एकदम टूटा,
जो अभी तक थोड़ी–थोड़ी पिचकारी छोड़ रहा था
पूरा मुंह का मसाला थूक के बोला।
“ अरे खुदा से तो खौफ खा ,
बीस दिन से देख रिआ हूं एक ही चीज बक रहा है ”।

मियां ने रहम की आंख उसके आंखों में डाली और बोला,
“अरे मैं नही थक रहा हूं तू क्यों थक रहा है,
एक बोतल, दो गड्डी और ले ले भाई,
ये मेरा सौवां बकरा है”।।

–ध्रुव

© Dhruv

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