...

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रंगमंच
कहानी मुख्तसर थी
परदा गिर गया ...
मेरा किरदारभी
अधुरा रह गया.... !
न तांलिया मिली
न गांलिया मिली
अहमियत मेरी
मुझे पता चली . ..!
फिरसे बनी नयी कहानी
बने नये किरदार .. .
रंगमंच वैसा ही रहा
निरपेक्ष और निर्विकार ... !
© Dr.Shiv Pandit
#lifelesson