...

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जरूरत
जरूरत किसको किसकी है
इस गुमान में न रहना
जरूरत यहॉं सभी को
सभी की है
बस ये गाँठ बाँधे रहना
पति को पत्नी की
बच्चों को अपने माता पिता की
भाई को बहन की
सास को बहु की
बहु को सास के दुलार की
ससुर को बहु को देखते ही
खाँसने की कोई दरकार नहीं
ये तो बिता वक्त हो गया
जरूरत है तो आँखों के लिहाज़ की
वाणी में मिठास की
सम्मान के बात की
जरूरत है तो बस
संस्कारों की चादर ओढ़ने की
जरूरत नहीं सास को माँ समझने की
सास को सास रहने दो
जरूरत है तो बस
एक दूजे के मनोभावों को समझने की
शादी के बाद एक बेटे की हालत समझने की
सास बहू के झगड़े में फंसा दिखता लफड़े में
एक दूजे के पाटन बीच फँसा
किस की तरफ से बोले
किस की तरफ से न बोले
जरूरत है बेटे को
सास बहू में सामंजस्य
स्थापित करवा
मेल मिलाप करवाने की
सास के समक्ष बहु द्वारा
कही तारीफ़ सुनाने की
बहु के पास सास
द्वारा तारीफों के पुल बाँधने की
ऐसे में दोनों आत्मग्लानि में डूब जाएंगी
एक दूजे की जरूरत जान जाएंगी
बेटी तो कभी कभार आ
माता पिता के प्रति सहानुभूति जता जाएगी
बहु आजीवन अपना फर्ज निभा जाएगी
जरूरत है बस एक दूजे को समझने की है
ये तो वो प्यार के रिश्तें हैं
जो आजीवन प्यार की डोर से बंधे दिखते हैं
जरूरत है तो बस समझने की
बाहरी लोगों की बातों में न आने की
अपने घर को स्वर्ग बनाने की
© Manju Pandey Choubey