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!! लत!!-----------------------

© Nand Gopal Agnihotri
!! लत!!
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जन्नत के ख्वाब में जहन्नुम पहुंच गए,
विश्वास के किसी के गला घोंटते रहे।
उनने तो सोचा लाल मेरा नाम करेगा,
अपने तो गये साथ ही उनको डुबो गये।
मनमानी रकम एटीएम विश्वास पर मिला,
सतसंगति मिली न सबकुछ डुबो दिया।
बेमौत मर रहा हूं कहीं के न रह गए,
पैसा खतम तो यार सारे छोड़ कर गए।
न ठौर कहीं घर में है बाहर न ठिकाना,
बेंचों में या फुटपाथ पर है रात बिताना।
ये लत नशे की बड़ी बुरी है यारो,
दरवाजे जहन्नुम के पहुंचा देती है यारो।
नन्द गोपाल अग्निहोत्री।