...

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ग़ज़ल...
भटकता हुआ मुसाफ़िर हूँ, मेरा रहनुमा बन जा
बेघर कोई बंजारा हूँ, मेरी ज़मीं-आसमां बन जा

ये मतलब की दुनिया, भला मेरे किस काम की
मुझे बस तेरी जरूरत है, तू मेरी दुनिया बन जा

मेरी हर एक...